Sunday, November 25, 2018

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज नहीं, दो अन्य मंत्री जाएंगे पाकिस्तानः आज की पांच बड़ी ख़बरें

करतारपुर कॉरिडोर के शिलान्यास कार्यक्रम में पाकिस्तान से न्योता मिलने के बावजूद सुषमा स्वराज वहां नहीं जा पाएंगी.

सुषमा स्वराज ने अपने व्यस्त कार्यक्रमों का हवाला देते हुए बताया कि उनकी जगह दो केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर और हरदीप सिंह पुरी इस कार्यक्रम में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे.

पाकिस्तान ने 28 नवंबर को होने वाले कार्यक्रम में शामिल होने के लिए सुषमा के साथ पंजाब के सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह और कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू को भी न्योता भेजा है.

राम मंदिर की मांग पर अयोध्या में विहिप की धर्मसभा
उत्तर प्रदेश की अयोध्या नगरी एक बार फिर राजनीति का बड़ा अखाड़ा बन गई है. राम मंदिर की मांग को लेकर विश्व हिंदू परिषद की ओर से रविवार को यहां धर्म सभा का आयोजन किया जा रहा है. वहीं शिवसेना अध्यक्ष और बड़ी तादाद में शिवसैनिक भी अयोध्या में जमे हुए हैं.

धर्म सभा में राम मंदिर निर्माण के लिए संसद में क़ानून लाने या दूसरे विकल्पों पर चर्चा की जाएगी.

शनिवार को अयोध्या पहुंच कर उद्धव ठाकरे ने सरयू नदी की तट पर महाआरती के बाद कहा, "हर हिन्दू की इच्छा है कि मंदिर जल्द से जल्द बने, यदि आप राम मंदिर पर अध्यादेश लाने जा रहे हैं, तो शिवसेना निश्चित रूप से आपका समर्थन करेगी. मैं सोये हुए कुंभकर्ण को जगाने आया हूं, मैं यहां राजनीति करने नहीं आया हूं."

इसके अलावा कई हिंदू संगठनों के लोग भी अयोध्या पहुंचे हैं.

इसे देखते हुए अयोध्या को सुरक्षा के क़िले में तब्दील कर दिया गया है.

प्रशासन ने सुरक्षा के लिए हज़ारों की संख्या में पुलिस, पीएसी और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की है

221 मीटर ऊंची होगी राम की प्रतिमा, तस्वीर जारी
उत्तर प्रदेश सरकार ने शनिवार देर रात अयोध्या में प्रस्तावित भगवान राम की कांस्य प्रतिमा की फ़ोटो जारी कर दी है.

यह तस्वीर मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ की मंजूरी मिलने के बाद आधिकारिक रूप से जारी की गई है.

अपर मुख्य सचिव सूचना और पर्यटन अवनीश अवस्थी ने बताया कि राम की मूर्ति 151 मीटर ऊंची और उसके ऊपर 20 मीटर का छत्र होगा. प्रतिमा का बेस-पैडस्टल 50 मीटर ऊंचा होगा. यानी कुल ऊंचाई 221 मीटर की होगी.

बेस-पैडस्टल के अंदर ही भव्य म्यूजियम भी होगा. इसमें अयोध्या का इतिहास, इक्ष्वाकु वंश के इतिहास में राजा मनु से लेकर आज तक का इतिहास, भगवान विष्णु के समस्त अवतारों के विस्तृत विवरण के साथ देश ही सभी सनातन धर्मों पर प्रदर्शन की व्यवस्था होगी.

Wednesday, November 7, 2018

यहां मंदिर था और रहेगा, सरयू तट पर राम की मूर्ति से बनेगी नई पहचा

 उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यानाथ दिवाली के मौके पर अयोध्या में विवादित जमीन पर बने अस्थायी राम मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचे। उन्होंने कहा कि सरयू के तट पर श्री राम की मूर्ति के लिए दो जगहें देखी हैं। ये मूर्ति अयोध्या की नई पहचान बनेगी। उन्होंने कहा- हम इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने पर काम कर रहे हैं, इसके लिए डिजाइन भी देखा गया है। 

विवादित जमीन पर योगी ने कहा, "आप सभी जानते हैं कि अयोध्या में मंदिर पहले से था। मैं यहां पर प्रार्थना करने आया हूं। मंदिर था, है और रहेगा। सरकार देख रही है कि इस मंदिर को भव्य कैसे बनाया जा सकता है। हमारे पास सभी विकल्प हैं। लेकिन, समाधान संविधान और कानून के जरिए आना चाहिए। हम इसका इंतजार कर सकते हैं।' यूपी सरकार ने सरयू के तट पर 151 फीट ऊंची राम मूर्ति का प्रस्ताव रखा है। हालांकि, मांग ये भी की जा रही है कि इस मूर्ति को 200 मीटर ऊंचा बनाया जाए, ताकि ये दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा हो।

फैजाबाद का नाम अयोध्या किया था
योगी ने राम मंदिर के अलावा हनुमान गढ़ी और कनक भवन में भी दर्शन किए। उन्होंने कहा- पंचकोसी और 14 कोसी परिक्रमा मार्ग को विकसित किया जाएगा। सरयू की सफाई भी एजेंडा में है। भूमिगत बिजली के तार बिछाने का काम भी जारी है। छोटी दीपावली पर अयोध्या में दीपोत्सव मनाया गया। इस मौके पर योगी ने ऐलान किया कि फैजाबाद का नाम अयोध्या होगा। उन्होंने कहा कि अयोध्या में राजा दशरथ के नाम पर मेडिकल कॉलेज और श्रीराम के नाम पर एयरपोर्ट बनाया जाएगा।

 छोटी दीपावली के मौके पर दीपोत्सव में शामिल होने आए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ऐलान किया कि फैजाबाद का नाम अब अयोध्या होगा। उन्होंने कहा- अयोध्या हमारी आन-बान-शान है और इसकी पहचान भगवान राम से होती है इसलिए जनपद फैजाबाद का नाम भी आज से अयोध्या होगा। उन्होंने उत्तर कोरिया की फर्स्ट लेडी किम-जुंग-सुक का स्वागत किया और कहा कि आज हम अतीत को याद करने के लिए इकट्ठा हुए हैं। योगी ने दशरथ के नाम पर मेडिकल कॉलेज और श्रीराम के नाम पर एयरपोर्ट बनाने का भी ऐलान किया। इसके बाद राम की पैड़ी पर 3 लाख दीये जलाए गए। यूपी सरकार की कोशिश इस कार्यक्रम को गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज कराने की है।

योगी आदित्यनाथ ने कहा, अयोध्या और कोरिया के रिश्ते 2000 साल पुराने हैं। तब अयोध्या की राजकुमारी से कोरिया के राजकुमार का विवाह हुआ था। अयोध्या और कोरिया के बीच पर्यटन को आने वाले वक्त में बढ़ावा मिलेगा। अतिथि देवो भव: की भारतीय संस्कृति के भाव को व्यक्त करने के लिए मैं कोरिया गणराज्य के राष्ट्रपति का धन्यवाद करता हूं। उन्होंने प्रथम महिला को भेजकर दोनों देशों के बीच पुराने रिश्ते को बढ़ाया है। आज हम अपने अतीत के साथ जुड़ रहे हैं।"

"अयोध्या के साथ अन्याय कोई ताकत नहीं कर सकती'
मुख्यमंत्री ने कहा- हम राम राज्य लाएंगे। ऐसा शासन जहां किसी प्रकार की दुख-दरिद्रता न हो, वही तो रामराज्य है। भावनाएं आज हिलोरें मार रही हैं। पूरा देश देख रहा है कि अयोध्या क्या चाहता है। अयोध्या के साथ कोई अन्याय नहीं कर सकता। दुनिया की कोई ताकत नहीं कर सकती।

किम-जुंग-सुक ने कहा कि मुझे आमंत्रित करने केे लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और योगी आदित्यनाथ का शुक्रिया। मैं सभी लोगों को दीपोत्सव की बधाई देती हूं। इस दौरान उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक, बिहार के राज्यपाल लालजी टंडन और केंद्रीय राज्यमंत्री वीके सिंह मौजूद थे।

पूजा के लिए 14 घंटे में 4 मुहूर्त, शाम 6.08 से 8.05 बजे तक का समय सर्वश्रेष्ठ

अाज दीपावली है। 14 घंटे में आप चार मुहूर्त में लक्ष्मी पूजन कर सकते हैं। लग्न के हिसाब से पूजा के लिए शाम 6.08 बजे से रात 8.05 बजे तक का समय सर्वश्रेष्ठ बताया गया है।

दीपावली पर 59 साल बाद शुक्र, सूर्य, चंद्रमा का दुर्लभ संयोग

ज्योतिषाचार्य दामोदर प्रसाद शर्मा के मुताबिक दीपावली पर शुक्र, सूर्य, चंद्रमा तुला राशि में है, जो मालव्य योग बनता है। जबकि बुध और बृहस्पति वृश्चिक राशि में, शनि धनु राशि में और मंगल कुंभ राशि में हैं। यह दीपावली पर 59 साल में बना श्रेष्ठ संयोग है। इस दिन महालक्ष्मी की पूजा के लिए 13 मिनट का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त रहेगा। जो शाम 6:20 से 6:33 के बीच होगा। इसमें प्रदोष काल, वृष लग्न और कुंभ का स्थिर नवमांश रहेगा।

दुनिया में दिवाली

दुनियाभर में 100 करोड़ से ज्यादा लोग दिवाली मना रहे। 15 देशों में आज छुट्‌टी होगी।
अमेरिकी राष्ट्रपति दिवाली पर पार्टी देंगे। ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी, न्यूजीलैंड समेत 35 देशों के राष्ट्राध्यक्ष कार्यक्रमों में शामिल होंगे।
दिवाली पर 2016 में अमेरिका ने डाक टिकट जारी किया था। करीब दो माह में ही 1 लाख 70 हजार टिकट बिक गए। यूएस पोस्टल सर्विस के इतिहास में यह बेस्ट सेलिंग स्टैंप बनी।
ज्यादातर देशों, सभ्यताओं और धर्मों में रोशनी का सबसे ज्यादा महत्व है। दुनियाभर में रोशनी से संबंधित 60 से ज्यादा त्योहार मनाए जाते हैं।
नीदरलैंड्स की ट्वेंटे यूनिवर्सिटी ने रिसर्च में पाया कि रोशनी एकाग्रता बढ़ाती है। इसका स्वास्थ्य और मूड पर सकारात्मक असर होता है। यहां तक कि कृत्रिम रोशनी भी हमारे काम करने की रफ्तार बढ़ाती है।
एेसे समृद्ध हो रहे हैं हम

सरकार के स्तर पर : सरकार को 2017-18 में इनकम टैक्स (कंपनी और व्यक्तिगत) से 10.02 लाख करोड़ रुपए मिले। 2012-13 में 5.59 लाख करोड़ रुपए और 2008-09 में 3.34 लाख करोड़ रुपए मिले थे। यानी 5 साल में टैक्स कलेक्शन 79% और 10 साल में 200% बढ़ा है।

कंपनियों के स्तर पर

शीर्ष 100 कंपनियों की वैलुएशन 5 साल में 44.9 लाख करोड़ रु. बढ़ी। 5 वर्षों में 144% की ग्रोथ रही।
रिलायंस इंडस्ट्रीज 8 लाख करोड़ रु. मार्केट कैप वाली देश की पहली, टीसीएस दूसरी कंपनी बनी। 1.6 लाख करोड़ रु. वैलुएशन के साथ फ्लिपकार्ट सबसे महंगा स्टार्टअप बना। 
लोगों के स्तर पर

वेतन वृद्धि: 2018 में वेतन वृद्धि 4.9% रही। अर्जेंटीना (7.2%) के बाद भारत दूसरे स्थान पर है।
आय: 1,12,835 रु. प्रति व्यक्ति हुई। 5 साल में 64% बढ़ी।
इनकम टैक्स: 2017-18 में रिकॉर्ड 6.85 करोड़ इनकम टैक्स रिटर्न फाइल हुए। पिछले साल से 23% ज्यादा।

Monday, November 5, 2018

राजघरानों की रियासत गई पर सियासत तो है!

कोई अपने नाम के आगे श्रीमंत और कुंवर साहब जैसी पदवियों से किनारा करता है तो कोई अंग्रेज़ी स्कूल में पढ़ने के बाद भी स्थानीय बोलियों को बोलने का अभ्यास करता है.
कोई क़िला छोड़कर सामान्य घर में रहता है तो कोई अपनी नई पीढ़ी को जनता से जुड़ने के लिए बाक़ायदा ट्रेनिंग दिलाता है.
मध्य प्रदेश की राजनीति में इन दिनों ये ख़ास प्रयोग हो रहे हैं.

यहां सियासत में खुद को सफल बनाने और जनता से जुड़े रहने के लिए राजघरानों और ज़मींदारों की नई पीढ़ी नए-नए तरीके आजमा रही है.

मध्य प्रदेश की राजनीति की गहरी समझ रखने वाले पत्रकार दीपक तिवारी कहते हैं कि अंग्रेज़ चले गए लेकिन हिंदुस्तान में राजे-रजवाड़े रह गए.

वो कहते हैं, "देसी रियासतों के भारत में विलय के बाद कई राज परिवारों ने लोकतंत्र के जरिए जनता पर शासन करने की नीति पर काम किया और काफ़ी हद तक इसमें सफल भी रहे."

ख़ास तौर पर मध्य प्रदेश में राज परिवारों, जागीरदारों और ज़मींदारों को ख़ूब चुनावी सफलता मिली.

दीपक तिवारी बताते हैं कि इमरजेंसी के बाद भाजपा ने कांग्रेस के ख़िलाफ़ ज़मीन तैयार करने के लिए राजघरानों को राजनीति में बहुत अवसर दिए. कांग्रेस ने भी ऐसा ही किया. यही वजह रही कि सिंधिया परिवार लगातार प्रदेश की राजनीति का केंद्र रहा तो चुरहट के अर्जुन सिंह मुख्यमंत्री बने.

फिर राघोगढ़ के राजपरिवार से आए दिग्विजय सिंह मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे. इनके अलावा गोविंद नारायण सिंह और राजा नरेशचंद्र सिंह भी मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे.

आज भी मध्य प्रदेश में राज परिवारों से जुड़े दो सांसद और कई विधायक हैं.

विंध्य और बुंदेलखंड
विंध्य और बुंदेलखंड इलाके में अभी भी सियासत राजपरिवारों और ज़मींदारों के इर्द-गिर्द ही घूमती है.

वरिष्ठ पत्रकार विनय द्विवेदी नामी परिवारों के राजनीति में आने की वजह बताते हैं.

वो कहते हैं, "ग्वालियर, राघोगढ़, रीवा, नरसिंहगढ़, चुरहट, खिचलीपुर, देवास, दतिया, छतरपुर, देवास और पन्ना जैसे छोटे-बड़े राजघराने मध्य प्रदेश प्रदेश की राजनीति में सक्रिय रहे और सफल भी."

उन्होंने कहा, ''दरअसल आज़ादी के बाद लोकतंत्र में भी ये राज परिवार सरकार द्वारा मिली संपत्तियों से धनी ही बने रहे. इसके साथ ही अपने अपने क्षेत्र में प्रभाव के चलते बड़ी संख्या में आम लोगों का जुड़ाव इनसे रहा. इसी का इस्तेमाल करते हुए इन परिवारों ने राजनीति में जब भी कदम रखा तो ज़्यादातर सफल ही हुए."

ज़माना बदला भी है...
बुंदेलखंड के युवा पत्रकार कृष्णकांत नगाइच कहते हैं, "हमने राजशाही का बीता दौर तो नहीं देखा लेकिन आज भी ग्रामीण क्षेत्र की जनता इन परिवारों के लोगों के लिए राजा साहब, महाराज, हुकुम, कुंवर सा और रानी सा जैसे सम्बोधनों का इस्तेमाल करती है."

लेकिन ज़माना बदला भी है. ख़ास तौर पर बीते एक दशक में मोबाइल क्रांति से ग्रामीण क्षेत्र की जनता में जागरूकता आई है. अब यही जनता इन राजपरिवारों को सियासत में तो देखना चाहती है लेकिन आम नेता की तरह.

सामाजिक कार्यकर्ता सचिन जैन का मानना है कि लोकतंत्र में आए इस बदलाव में ख़ास तौर पर युवा हैं. वो कहते हैं, ''युवा चाहते हैं कि अगर कोई राज परिवार या पुराने ज़मींदार परिवार से है तो भी वह सामान्य राजनैतिक व्यक्ति की तरह जनता से मिले न कि अपने इतिहास की वजह से.''

दोस्ताना व्यवहार
टीकमगढ़ ज़िले के ज़मींदार परिवार से रहे पृथ्वीपुर के पूर्व विधायक बृजेन्द्र सिंह राठौर इसी भाव को लंबे समय पहले परखने का दावा करते हैं.

वो कहते हैं कि उन्होंने राजनीति की शुरुआत से ही उस तबके को बराबर बिठाना शुरू किया जो हमें बहुत बड़ा और ख़ुद को याचक मानता था.

उनके मुताबिक आज क्षेत्र के युवा ये मानते हैं कि उनसे दोस्ताना व्यवहार हो. यही वजह है कि जब उनके बेटे नितेन्द्र बाहर से पढ़ाई करके लौटे तो उन्होंने उसे भी जनता से जुड़ने के लिए स्थानीय बोली बुंदेली में बात करने की सलाह दी.